आत्मनिर्भर बनने की राह पर आईआईटी दिल्ली
दिव्या अग्रवाल, नई दिल्ली: कोरोना वायरस के चलते आईआईटी दिल्ली के रिसर्चर्स और आईआईटी दिल्ली के स्टार्ट अप जोखिम उठाते हुए कई तरह के आविष्कार कर रहे है। चाहे वो पीपीई किट हो, मास्क हो या कोरोना संक्रमण की जांच करने वाली किट हो और ऐसा करने में कई तरह की चुनौतियों का सामना भी कर रहे है।
हर आविष्कार में रोजगार पैदा करेगा आईआईटी दिल्ली
प्रधानमंत्री मोदी के देश को आत्मनिर्भर कहे जाने की बात को भी आईआईटी दिल्ली अपनाने की कोशिश में लगा है। कोविड 19 के चलते जो आविष्कार आईआईटी दिल्ली द्वारा किये जा रहे है, उसमें आतनिर्भरता अपनाने की कोशिश की गई है। अभी तक आईआईटी दिल्ली का नाम उन 10 अंतरराष्ट्रीय इंस्टीटूट में शुमार हो चुका है जोकि सबसे अलग यानी यूनिकॉर्न फाउंडर पैदा करते है। वहीं आईआईटी दिल्ली ने सबसे ज्यादा स्टार्टअप को भी मदद देना शुरू किया है, यही नही इससे कई तरह के फंड्स भी पैदा किये हैं।
आईआईटी दिल्ली बना यूनिकॉर्न फाउंडर
आईआईटी दिल्ली रिसर्च की सुविधायों को और बेहतर बनाने के लिए अभी तक 350 करोड़ रुपये लगा चुका है। वहीं फ्लैगशिप प्रोग्राम जैसे उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत भी कई तरह के विकास के काम करता रहता है।
आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर रामगोपाल रॉ का कहना है कि हमारा लक्ष्य अब नए रोजगार पैदा करना है। आईआईटी का हर दूसरा छात्र अब व्यवसायी बनने का सपना देखता है। चूंकि आईआईटी दिल्ली उन्हें मदद करता है। पिछले 4 सालों में आईआईटी दिल्ली 10 पहल कर चुका है, जिसमें व्यवसाय को बढ़ाने और बनाने के लिए कैंपस के अंदर ही माहौल तैयार किया गया है। छात्र ही नहीं आईआईटी दिल्ली की फैकल्टी को भी आत्मनिर्भर बनाने हेतु के मौके दिए गए है, जिससे वो अपनी रिसर्च को आगे बढ़ सके।
फिलहाल एक रीसर्च और डेवलपमेंट के तहत ही 100 से ज्यादा स्टार्टअप को शुरू किया गया है। वहीं आईआईटी का लक्ष्य है कि 2021 तक 200 पेटेंट्स आईआईटी के नाम हो। यानी एक ऐसा कानूनी अधिकार जोकि विशेष उत्पाद, खोज या डिज़ाइन प्रक्रिया पर किसी विशेष व्यक्ति या संस्था को एकाधिकार देता है।
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