लोन मोरेटोरियम इंटरेस्ट मामला: बैंकों-ग्राहकों के बीच का ममला कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकता केंद्र- सुप्रीम कोर्ट

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: लॉक डाउन अवधि में ई एम आई पर ब्याज में छूट की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि कि ब्याज लोन मोरेटोरियम पर इंटरेस्ट में छूट देना मुमकिन नहीं होगी। इसका नुकसान बैंक की आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा। और आखिरकार बोझ  जमाकर्ताओं पर ही पड़ेगा।  केंद्र सरकार के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। सरकार यह कह कर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि यह बैंकों और ग्राहकों के बीच का मसला है।

कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र ने लोन मोरेटोरियम की घोषणा की है, तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राहकों को उस योजना का लाभ भी मिले। ग्राहकों ने मोरेटोरियम नहीं लिया, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने इस मामले का कुछ समाधान निकालने के लिए वक्त लिया था, लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।

बैंकों के संगठन आईबीए एसबीआई ने मामले पर सुनवाई तीन महीने टालने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त तक सुनवाई टाल दी है। कोर्ट ने अपने आज के आदेश में कहा है कि केंद्र सरकार और RBI इस मामले की समीक्षा करें। इंडियन बैंक एसोसिएशन देखेगी की क्या मोरेटोरियम अवधि के मुद्दे को लेकर क्या नई गाइड लाइन्स लायी जा सकती हैं या नही? अगली सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में होगी।

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