मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों का इंश्योरेंस कवर के तहत इलाज क्यों नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने IRDA से मांगा जवाब
प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बीमा नियामक अधिकरण कम्पनी (IRDA) को नोटिस जारी कर पूछा है कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों का इलाज इंश्योरेंस कवर में क्यों नहीं किया जाता? मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाले समाजसेवी एडवोकेट गौरव बंसल की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने IRDA के साथ साथ केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है।
गौरव बंसल ने सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा है कि मेंटल हैल्थ केअर एक्ट, 2017 में प्रावधान होने के बावजूद इंश्योरेंस कम्पनियां मानसिक बीमारियों को इंश्योरेंस कवरेज में शामिल नहीं कर रही हैं। मेंटल हैल्थ केअर एक्ट, 2017 के सेक्शन 21(4) के प्रावधान के मुताबिक इंश्योरेंस कम्पनियां शारीरिक बीमारी और मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति में भेद नहीं करेगी। जो सुविधा और इलाज शारीरिक बीमारी के मामले में दी जाएगी, वही इलाज और सुविधा मानसिक बीमारी के मामले में दी जाएगी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मेंटल हैल्थ केअर एक्ट, 2017 के प्रावधान के अनुपालन के लिए IRDA ने इंश्योरेंस कम्पनियों के लिए 16 अगस्त 2018 को एक सर्कुलर जारी किया था। याचिका में कहा गया है कि IRDA के सर्कुलर को एक साल से अधिक बीत जाने के बावजूद किसी इंश्योरेंस कम्पनी ने उसपर अमल किया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामले में IRDA के पास इंश्योरेंस कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन IRDA ने आजतक किसी कम्पनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। जनहित याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि कोर्ट इस सम्बंध में उचित आदेश पारित करे।
गौरतलब है कि कोरोना काल में बीमारी की दुश्चिंता के साथ , बेरोजगारी के खतरे की वजह से लोगों में अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में इस याचिका में उठायी गयी मांग बहुत महत्वपूर्ण है।
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